सोमवार, 19 अक्टूबर 2020
महिलाओ से बढ़ता अपराध
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020
कॉरॉना पर जलती पराली का असर ।
नेता जी की भाषणबाजी और कार्य
भाशड़बजी और कार्य
राजनीति और भाषण दोनो एक दूसरे के पूरक है। बिना भाषण की राजनीति संभव नही है। राजनीति में भाषण वो हथियार है जिस के द्वारा सत्ता प्राप्त होती है। भाषण कला भी है और विज्ञान के साथ मनोविज्ञान भी। आप के भाषण का असर जनता के दिलो दिमाग पर बहुत पड़ता है। आप भाषणबाज़ी से लोगों के दिमाग को गुलाम बना सकते हो। इसे माइंडटेंपरिंग, माइंडवाश भी कहते है ।
अच्छे भाषणबाजो को इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्जा मिलता है। आप की सोच, आप का मिशन – विजन, आप के इरादे, आप की योग्यता का दर्पण होता है भाषण। भाषण आप की राजनीति छवि बनाता और बिगाड़ता है। आप का हर भाषण आप के बुलंद इरादों की गवाही होते है। किसी ने सही ही कहा है की “ सौ बार सोच समझ के बोलो “ ।अज्ञानी पहले बोलते है फिर सोचते है जबकि ज्ञानी तोल मोल के बोलते है।
राजनीति में जब भी भाषणों की बात होती है उस समय हमें सबसे पहले राजनीति पर ही बाते करनी पड़ती है. इस देश को चलाने के लिए सरकार की बहुत आवश्यकता होती है जिसे भारत की जनता चुनती है | इसीलिए कई बड़े-2 नेता सरकार लाने के लिए जनता के सामने कई प्रेरणादायक भाषण देते है जो की उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होते है | उन भाषणों में वह लोगो को वाद्दे करते है, अपनी योजना व देश के विकास की बताते है, वे जनभावनाओं का इस्तेमाल करते है.
इसीलिए हम आपको राजनीति के ऊपर कुछ ज्यादा नही बताते आप खुद ही अनुभवी हो। बेहतर होगा की आप राजनीति पार्टियों के 5 साल पहले के भाषण पढ़ कर आप इनके बारे में बहुत कुछ जान सकते है | इन के इरादों, इनके वादों का सही मूल्यांकन कर सके। मै भारत के चुनाव आयोग से निवेदन करूँगा की चुनाव में राजनीतिक पार्टियों और उस के नेता के भाषण, वाद्दे, उन का घोषणापत्र को जनता के साथ मौखिक ओर लिखित अनुबंध के अंतर्गत ले और कानून इस का वजूद होना चाहिए।
अगर देश की जनता को देश का विकास चाहिए तो , जनता को मिलकर रहना होगा , राजनैतिक पार्टियां जनता को वोट बैंक के नजरिए से देखती है , और हमारा इस्तेमाल करती है , हम सभी को एक जुट होकर सच्चाई के लिए लड़ना होगा , हमें हिन्दू - मुस्लिम में विभाजित होकर नहीं रहना होगा , हमारे बीच जाती - व धर्म की लड़ाई करवा कर राजनैतिक पार्टियां अपने फायदे के लिए हमारा ही इस्तेमाल करती है ।
इस कानून से ना केवल सत्ताधारी पार्टियों में बल्कि विपक्षी पार्टियों में दबाव बनेगा , और राजनैतिक पार्टियां जनता को झूठे झुमलो से बेहेला नहीं सकेंगे ,
व जनता उस को ही चुनेगी जो उस से विकासशील लगेगा ।
शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020
जय जवान , जय किसान !
जय जवान जय किसान!
2 अक्टूबर का दिन बेहद खास है क्योंकि इस दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन के साथ ही देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) की जयंती भी 2 अक्टूबर (2 October) को मनाई जाती है। लाल बहादुर शास्त्री के प्रभावशाली व्यक्तित्व का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि विदेशों में भी उनके विचारों और निडरता की तारीफ की जाती थी।
'जय जवान, जय किसान' का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री
लाल बहादुर शास्त्री ने अपना पूरा जीवन गरीबों की सेवा में समर्पित कर दिया था। शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में दो अक्टूबर, 1904 को शारदा प्रसाद और रामदुलारी देवी के घर हुआ था। देश की आजादी में लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) का खास योगदान है। साल 1920 में शास्त्री ने भारत की आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए थे। स्वाधीनता संग्राम के जिन आंदोलनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, उनमें 1921 का असहयोग आंदोलन, 1930 का दांडी मार्च और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उल्लेखनीय हैं। शास्त्री ने ही देश को 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया था।
आज ना तो नारा देने वाली बहादुर शास्त्री हमारे बीच है और , ना ही उनका दिया गया नारा ।
किसान हमे अन्न देता है , किसान को भारत में अन्न देवता भी कहा जाता है , लेकिन आज के दौर की अगर तस्वीरें देखे तो शायद वह अन्न देवता ही सबसे निराश है , निराशा की वजह सरकार द्वारा पारित किया गया कृषि बिल , आज हमारा किसान सड़कों पर विरोध के लिए उतरा हुए है ,
ऐसे में हमे श्री महात्मा गांधी जी और श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को याद करते हुए किसानों कि आवाज़ को सुनना चाहिए ।
और दूसरी जगह हमारे जवान जो सरहद पर दिन रात तैनात रह कर पूरे देश और देशवासियों की सुरक्षा कर रहे है , उनका सम्मान करते रहना का एक संकल्प लेना चाहिए और , अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझते हुए उनका मान - सम्मान को बढ़ा कर बरकरार करना चाहिए ।
अगर देश का किसान और जवान खुश है , तब ही देश में रहने वाले देशवासी खुश है ।
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