सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

महिलाओ से बढ़ता अपराध


देश में बढ़ रहा महिलाओं से अपराध

महिलाएं हमारे समाज का एक ऐसा विशेष अंग है , जिसका होना उतना ही आवश्यक है जितना की , किसी भी अन्य व्यक्ति का ।
भारत में महिलाओं को ' देवी दुर्गा ' का रूप कहा जाता है , 
महिला एक मा होती है , महिला एक बेटी होती है , महिला एक बहन होती है , और तमाम रिश्ते एक महिला अपने जीवन में निभाती है ।
परन्तु आज के इस दौर में मानो महिलाओं के जीवन का कोई महत्व ना रह गया हो , और अब तो ऐसा प्रेरित होता है जैसे महिलाएं घर से बाहर परन्तु घर के अंदर भी सुरक्षित नहीं है ।
सरकारी आंकड़ों को देखे तो 70 फीसदी महिलाओं से अपराध के मामले उनके किसी जानकार के द्वारा किया जाता है ।
यह बेहद शर्मनाक व अमानवीय अपराध है , के आज के नए दौर में हमारी बहू , बेटियां सुरक्षित नहीं है ।
यह हमारे समाज की विफलता है के हमारे समाज में कुछ ऐसे लोग है जो महिलाओं का सम्मान नहीं करते व उनके साथ रेप जैसे जगन्य अपराध तक करते है ।
हाल ही में आए नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आए 2019 के अकड़ो को देखे तो आज भारतवर्ष में हर 16 मिनट में एक रेप होता है । और दिन भर में 87 सिर्फ रेप से हुए अपराध सामने आते है
और अफसोस तब होता है जब हमारे देश की नियाए वियावस्था एक रेप के अपराधी को मौत की साजा भी नहीं दे पाती , जैसा कि हमने देखा निर्भया के केस में , पीड़िता को नियत मिलने में 7 साल का वक्त लग गया ।
और रोजाना यह देखने को मिलता है , जिन्हें हमने अपनी व अपनी बहू , बेटियों की सुरक्षा के लिए भारत की संसद में भेजा है , वह लोग खुद अक्सर महिलाओं का सम्मान नहीं करते ।
चाहे वह किसी भी राजनीतिक पार्टी से संबंध रखते हो , 
लेकिन महिलाओं के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी अक्सर देखने को मिलती है ।

खुद सरकार चला रहे लोग जब रेप जैसे जघन्य अपराध करते है तब लगता है जैसे किसी चोर को तिजोरी की रखवाली के लिए खड़ा कर दिया हो ।

राजनीति का प्रभाव इतना है कि वह नेता जिसे पीड़िता के साथ खड़ा होकर उसे नीयाए दिलाना चाहिए वह नेता अपराधी के साथ खड़े हो कर पीड़ित महिलाओं पर ही सवाल खड़े कर देते है ।
जैसा कि हाल हि में हमने हाथरस में देखा , की कैसे भारतीय जनता पार्टी के नेता रंजीत बहादुर श्रीवास्तव आरोपियों के समर्थन में उतरे और बोले कि ' कोई आरोपियों को एक दिन कि साजा दे कर दिखाए ' 
उधर कांग्रेस के नेता कमलनाथ ने एक महिला उम्मीदवार को खुले मंच से ' आइटम ' व ' भूकी नंगी ' जैसे शब्दों से अपमान किया , महिला का नाम इमारती देवी है जो बीजेपी से खड़ी हुई चुनाव के लिए उम्मीदवार है ।
उधर कुछ समय पहले समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने बीजेपी की नेता जया प्रधा के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और उन्हें ' नाचने गाने वाली औरत ' व उनके अंदरुनी वस्त्रों के रंग तक को खुले मंच से बड़ी ही बेशर्मी से कहा ।
यह राजनीति का दुष्प्रभाव है कि आज काल नेता अपनी भाषा पर लगाम नहीं लगते और जो चाहे बोल देते है , 
और इस सब के बावजूद ऐसे बेशर्म नेताओ पर कोई कारवाई नहीं होती , जिस से उन लोगो को भी बल मिलता है जो महिलाओं से अपराध करते है ।

हमे ऐसे नेताओ व उनकी राजनीति को समझना होगा ,
और अपनी व अपनी बहू बेटियों की सुरक्षा करनी होगी ।
और हमे अपने समाज को खुद ही सुधारना होगा , अपने बच्चो को 
सीखना होगा कि कैसे सबका सम्मान लिया जाता है , 
और सभी को सिक्षित करना होगा ।


शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020

कॉरॉना पर जलती पराली का असर ।

कोरॉना पर जलती पराली का असर
 
अन्नदाता किसानों पर हाल के कुछ वर्षों में पराली जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगने लगा है। कुछ हद तक यह सही भी है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार गत वर्ष 27 सितम्बर से 9 नवम्बर के बीच राज्य में पराली जलाने की कुल 39,973 घटनाएँ दर्ज की गई। इनमें से 22,313 घटनाएँ 1 से 9 नवम्बर के बीच सामने आई।

 कृषि एवं पर्यावरण क्षेत्र के विशेषज्ञों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर इस बार किसानों को पराली जलाने से रोकने में सरकार फेल रही तो कोविड-19 महामारी की समस्या में बेतहाशा इजाफा हो सकता है।

रबी फसल की बुवाई के मौसम से पहले इस महीने के अंत तक पराली जलाने की प्रक्रिया शुरू होने की आशंका है। इस कारण कोरोना वायरस महामारी और भयावह रूप ले सकती है। एक कृषि एवं पर्यावरण विशेषज्ञ ने इस बात को लेकर आगाह किया है। इनका कहना है कि पराली जलाने से पैदा हुआ धुआं लोगों के श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाएगा तो कोरोना वायरस का असर और घातक हो जाएगा।


पराली क्या होती है?

पराली धान की फसल कटने के बाद बचा बाकी हिस्सा होता है, जिसकी जड़ें ज़मीन में होती हैं। किसान धान पकने के बाद फसल का ऊपरी हिस्सा काट लेते हैं क्योंकि वही काम का होता है बाकी किसान के लिये बेकार होता है। 

उन्हें अगली फसल बोने के लिये खेत खाली करने होते हैं तो सूखी पराली को आग के हवाले कर दिया जाता है। 

आजकल पराली इसलिये भी अधिक होती है क्योंकि किसान अपना समय बचाने के लिये मशीनों से धान की कटाई करवाते हैं।

 मशीनें धान का केवल ऊपरी हिस्सा काटती हैं और नीचे का हिस्सा अब पहले से ज़्यादा बचता है। 
इसे हरियाणा तथा पंजाब में पराली कहा जाता है। 

यदि किसान हाथों से धान की कटाई करें तो खेतों में पराली नहीं के बराबर बचती है। 

बाद में किसान इस पराली को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। 

एक्सपर्ट की चेतावनी
फसल अवशेषों के प्रबंधन को लेकर केंद्र एवं पंजाब सरकार के सलाहकार संजीव नागपाल ने रविवार को कहा, 'यदि पराली जलाने के वैकल्पिक प्रबंध नहीं किए गए तो प्रदूषणकारी तत्व, कार्बन मोनोऑक्साइड और मीथेन जैसी जहरीले गैसों के कारण श्वसन संबंधी गंभीर समस्याओं में बढ़ोतरी हो सकती है, जिसके चलते कोविड-19 के हालात और बिगड़ जाएंगे क्योंकि कोरोना वायरस श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है।'


पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने की बड़ी समस्या
उन्होंने कहा, 'पिछले साल पंजाब में पराली जलाने के करीब 50 हजार मामले सामने आए थे। उत्तर के मैदानी इलाकों के वातावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा में 18 से 40 फीसदी योगदान पराली जलाने का रहता है। पराली जलने के कारण मीथेन, कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली प्रदूषणकारी गैसें भारी मात्रा में उत्पन्न होती हैं।' पिछले साल दिल्ली-एनसीआर के 44 फीसदी प्रदूषण की वजह पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना रहा।
निष्कर्ष

किसानों के पराली जलाने के मुख्य कारणों में कटाई के लिए मजदूरों का ज्यादा पैसे की मांग और अधिक समय लगना भी है। यहाँ समझने की जरूरत है कि पराली (stubble) बहुपयोगी स्रोत भी हो सकता है। अप्रैल में गेहूँ की फसल काटने के बाद धान उगाने के बीच लगभग तीन माह का समय होता है। इस बीच गेहूँ के अवशेष को आसानी से पर्यावरण हितैषी तरीके से निस्तारित किया जा सकता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में कुछ किसानों ने न सिर्फ पराली को खेतों में दबाकर बनी खाद से अच्छी फसल ली बल्कि कुछ ने तो खाद को बेचकर नकदी भी अर्जित की। अब सवाल यह है कि पराली निस्तारण को लेकर ऐसी आम जानकारियाँ भी लोगों तक पहुँची नहीं हैं, तो इसके पीछे क्या कारण है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में भी बहुत से किसान पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और कम्पोस्ट खाद जैसे नामों से अनजान हैं। सरकार ने जिन एजेंसियों को ऐसे मामलों में जागरूकता की जिम्मेदारी सौंपी है, वे गाँवों में जाते तक नहीं हैं। ऐसे में पराली अब एक विकराल समस्या बन कर खड़ी हो गई हैं।

हर इंसान को कार्य करता है को उसका जीवन सरल बनते है , और आसान होते है , उस है तरह हमारे देश के किसान भी मजबूरन खेत में बची पराली को जलते है ।
जैसा कि हम सब समझ चुके है कि पराली का जलना हमारे लिए कितना नुकसानदायक है , सरकार चाहे तो नए किसान बिल में पुनः विचार करके उसमे पराली कि समस्या का भी उपाय रख सकती है , 
या तो बची पराली को खाद में तेह समय में बदल दिया जाए , या भेच कर किसानों को ही आर्थिक मदद की जाए ।

या तो मके इन इंडिया के तहत सब्सिडरी देते हुए ऐसी मशीनरी का निर्माण किया जाए जी फसल को ना केवल ऊपर से काटे बल्कि नीचे तक से कर कर खेत को साफ करे ।
जिस से देशवासियों और किसान दोनों का हित्त हो ।
जिस से देश में नए रोजगार भी पैदा होंगे लोगो में प्रोत्साहन आयेगा , व देश और गति से विकास सकेगा ।


नेता जी की भाषणबाजी और कार्य

भाशड़बजी और कार्य 


राजनीति और भाषण दोनो एक दूसरे के पूरक है। बिना भाषण की राजनीति संभव नही है। राजनीति में भाषण वो हथियार है जिस के द्वारा सत्ता प्राप्त होती है। भाषण कला भी है और विज्ञान के साथ मनोविज्ञान भी। आप के भाषण का असर जनता के दिलो दिमाग पर बहुत पड़ता है। आप भाषणबाज़ी से लोगों के दिमाग को गुलाम बना सकते हो। इसे माइंडटेंपरिंग, माइंडवाश भी कहते है ।


अच्छे भाषणबाजो को इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्जा मिलता है। आप की सोच, आप का मिशन – विजन, आप के इरादे, आप की योग्यता का दर्पण होता है भाषण। भाषण आप की राजनीति छवि बनाता और बिगाड़ता है। आप का हर भाषण आप के बुलंद इरादों की गवाही होते है। किसी ने सही ही कहा है की “ सौ बार सोच समझ के बोलो “ ।अज्ञानी पहले बोलते है फिर सोचते है जबकि ज्ञानी तोल मोल के बोलते है।


राजनीति में जब भी भाषणों की बात होती है उस समय हमें सबसे पहले राजनीति पर ही बाते करनी पड़ती है. इस देश को चलाने के लिए सरकार की बहुत आवश्यकता होती है जिसे भारत की जनता चुनती है | इसीलिए कई बड़े-2 नेता सरकार लाने के लिए जनता के सामने कई प्रेरणादायक भाषण देते है जो की उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होते है | उन भाषणों में वह लोगो को वाद्दे करते है, अपनी योजना व देश के विकास की बताते है, वे जनभावनाओं का इस्तेमाल करते है.


इसीलिए हम आपको राजनीति के ऊपर कुछ ज्यादा नही बताते आप खुद ही अनुभवी हो। बेहतर होगा की आप राजनीति पार्टियों के 5 साल पहले के भाषण पढ़ कर आप इनके बारे में बहुत कुछ जान सकते है | इन के इरादों, इनके वादों का सही मूल्यांकन कर सके। मै भारत के चुनाव आयोग से निवेदन करूँगा की चुनाव में राजनीतिक पार्टियों और उस के नेता के भाषण, वाद्दे, उन का घोषणापत्र को जनता के साथ मौखिक ओर लिखित अनुबंध के अंतर्गत ले और कानून इस का वजूद होना चाहिए। 


अगर देश की जनता को देश का विकास चाहिए तो , जनता को मिलकर रहना होगा , राजनैतिक पार्टियां जनता को वोट बैंक के नजरिए से देखती है , और हमारा इस्तेमाल करती है , हम सभी को एक जुट होकर सच्चाई के लिए लड़ना होगा , हमें हिन्दू - मुस्लिम में विभाजित होकर नहीं रहना होगा , हमारे बीच जाती - व धर्म की लड़ाई करवा कर राजनैतिक पार्टियां अपने फायदे के लिए  हमारा ही इस्तेमाल करती है ।


इस कानून से  ना केवल सत्ताधारी पार्टियों में बल्कि विपक्षी पार्टियों में दबाव बनेगा , और राजनैतिक पार्टियां जनता को झूठे झुमलो से बेहेला नहीं सकेंगे ,

व जनता उस को ही चुनेगी जो उस से विकासशील लगेगा ।



शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

जय जवान , जय किसान !

जय जवान जय किसान!


2 अक्टूबर का दिन बेहद खास है क्योंकि इस दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन के साथ ही देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) की जयंती भी 2 अक्टूबर (2 October) को मनाई जाती है। लाल बहादुर शास्त्री के प्रभावशाली व्यक्तित्व का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि विदेशों में भी उनके विचारों और निडरता की तारीफ की जाती थी। 

'जय जवान, जय किसान' का नारा देने वाले लाल बहादुर शास्त्री 


लाल बहादुर शास्त्री ने अपना पूरा जीवन गरीबों की सेवा में समर्पित कर दिया था। शास्त्री का जन्म उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में दो अक्टूबर, 1904 को शारदा प्रसाद और रामदुलारी देवी के घर हुआ था। देश की आजादी में लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri)  का खास योगदान है। साल 1920 में शास्त्री ने भारत की आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए थे। स्वाधीनता संग्राम के जिन आंदोलनों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, उनमें 1921 का असहयोग आंदोलन, 1930 का दांडी मार्च और 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन उल्लेखनीय हैं। शास्त्री ने ही देश को 'जय जवान, जय किसान' का नारा दिया था।

आज ना तो नारा देने वाली बहादुर शास्त्री हमारे बीच है और , ना ही उनका दिया गया नारा ।

किसान हमे अन्न देता है , किसान को भारत में अन्न देवता भी कहा जाता है , लेकिन आज के दौर की अगर तस्वीरें देखे तो शायद वह अन्न देवता ही सबसे निराश है , निराशा की वजह सरकार द्वारा पारित किया गया कृषि बिल , आज हमारा किसान सड़कों पर विरोध के लिए उतरा हुए है ,

ऐसे में हमे श्री महात्मा गांधी जी और श्री लाल बहादुर शास्त्री जी को याद करते हुए किसानों कि आवाज़ को सुनना चाहिए ।

और दूसरी जगह हमारे जवान जो सरहद पर दिन रात  तैनात रह कर पूरे देश और देशवासियों की सुरक्षा कर रहे है , उनका सम्मान करते रहना का एक संकल्प लेना चाहिए और , अपनी नैतिक जिम्मेदारी को समझते हुए उनका मान - सम्मान को बढ़ा कर बरकरार करना चाहिए । 

अगर देश का किसान और जवान खुश है , तब ही देश में रहने वाले देशवासी खुश है । 


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