क्या इस ज़माने में महिलाएं सही में आज़ाद है?
कहा जाता है के आज के इस आधुनिक दौर में लड़कियां लड़कों से कंधे से कंधे मिला कर चलने में सक्षम है ।
पर क्या सही में ऐसा ही है ?
क्या अब हमारे देश में लड़कियां खुद इतनी सक्षम हैं के उन्हें लड़कों के साथ नापा जा सके ।
इसका जवाब हम सब बेहतर जानते है और समझते भी है ।
क्योंकि आज भी जब एक लड़की अकेले अंधेरी रात में बाहर जाने का सोचती है , मगर उस डर लगता है।
जब दिन के उजाले में भारी - भीड़ में एक औरत को जाना होता है तब उसे डर लगता है।
उस लड़की को डर लगता है उन दरिंदो से जो अंधेरी रात में उस अकेली लड़की का ग़लत फायदा उठाकर उसके साथ अमानवीय काम करते है,
उस औरत को डर लगता है उस भीड़ में उन दरिंदो से जो भीड़ की आड़ में उस औरत को गलत तरीक़े से हाथ लगाते है ।
यह कैसी आज़ादी है ?
जहा हम अपनी बेटी को तो आज़ादी देते है ,
लेकिन जब दूसरे घर की बेटी को बहू बनकर लेट है , तब उसे चार दिवारी में बंद करके रखते है ।
जहा बेटी को तो अपने मन्न की आज़ादी होती है
लेकिन बहू को पांच मिनट ज़्यादा आराम करने की आज़ादी नहीं ।
जहा बेटी को तो आज़ादी है कि वह अपनी आज़ादी से किसी भी तरह के वस्त्र पहने , लेकिन बहू के सर से पल्लू नहीं सरकना चाहिए ?
यह कैसी आज़ादी है ?
Its just the society to be changed...girls should not be compared to boys...because girls are much and much stronger than boys not matter its its daughter or daughter-in-law....
जवाब देंहटाएंdefinately but we've to teach our sons to behave and we've to look into our society .
हटाएं