शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020

नेता जी की भाषणबाजी और कार्य

भाशड़बजी और कार्य 


राजनीति और भाषण दोनो एक दूसरे के पूरक है। बिना भाषण की राजनीति संभव नही है। राजनीति में भाषण वो हथियार है जिस के द्वारा सत्ता प्राप्त होती है। भाषण कला भी है और विज्ञान के साथ मनोविज्ञान भी। आप के भाषण का असर जनता के दिलो दिमाग पर बहुत पड़ता है। आप भाषणबाज़ी से लोगों के दिमाग को गुलाम बना सकते हो। इसे माइंडटेंपरिंग, माइंडवाश भी कहते है ।


अच्छे भाषणबाजो को इतिहास के सुनहरे पन्नो में दर्जा मिलता है। आप की सोच, आप का मिशन – विजन, आप के इरादे, आप की योग्यता का दर्पण होता है भाषण। भाषण आप की राजनीति छवि बनाता और बिगाड़ता है। आप का हर भाषण आप के बुलंद इरादों की गवाही होते है। किसी ने सही ही कहा है की “ सौ बार सोच समझ के बोलो “ ।अज्ञानी पहले बोलते है फिर सोचते है जबकि ज्ञानी तोल मोल के बोलते है।


राजनीति में जब भी भाषणों की बात होती है उस समय हमें सबसे पहले राजनीति पर ही बाते करनी पड़ती है. इस देश को चलाने के लिए सरकार की बहुत आवश्यकता होती है जिसे भारत की जनता चुनती है | इसीलिए कई बड़े-2 नेता सरकार लाने के लिए जनता के सामने कई प्रेरणादायक भाषण देते है जो की उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण होते है | उन भाषणों में वह लोगो को वाद्दे करते है, अपनी योजना व देश के विकास की बताते है, वे जनभावनाओं का इस्तेमाल करते है.


इसीलिए हम आपको राजनीति के ऊपर कुछ ज्यादा नही बताते आप खुद ही अनुभवी हो। बेहतर होगा की आप राजनीति पार्टियों के 5 साल पहले के भाषण पढ़ कर आप इनके बारे में बहुत कुछ जान सकते है | इन के इरादों, इनके वादों का सही मूल्यांकन कर सके। मै भारत के चुनाव आयोग से निवेदन करूँगा की चुनाव में राजनीतिक पार्टियों और उस के नेता के भाषण, वाद्दे, उन का घोषणापत्र को जनता के साथ मौखिक ओर लिखित अनुबंध के अंतर्गत ले और कानून इस का वजूद होना चाहिए। 


अगर देश की जनता को देश का विकास चाहिए तो , जनता को मिलकर रहना होगा , राजनैतिक पार्टियां जनता को वोट बैंक के नजरिए से देखती है , और हमारा इस्तेमाल करती है , हम सभी को एक जुट होकर सच्चाई के लिए लड़ना होगा , हमें हिन्दू - मुस्लिम में विभाजित होकर नहीं रहना होगा , हमारे बीच जाती - व धर्म की लड़ाई करवा कर राजनैतिक पार्टियां अपने फायदे के लिए  हमारा ही इस्तेमाल करती है ।


इस कानून से  ना केवल सत्ताधारी पार्टियों में बल्कि विपक्षी पार्टियों में दबाव बनेगा , और राजनैतिक पार्टियां जनता को झूठे झुमलो से बेहेला नहीं सकेंगे ,

व जनता उस को ही चुनेगी जो उस से विकासशील लगेगा ।



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