पुलिस की बिगड़ती छवि !
फिल्मों में पुलिस बल को जिस तरह से दिखाया जाता है, उस वजह से फिल्मों ने आम आदमी के जहन में पुलिस की बहुत खराब छवि बना दी है।
फिल्मी जगत ने आम आदमी के दिमाग में पुलिस की एक बहुत बुरी छवि बना दी है और मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि ऐसा क्यों? हां, कुछ कमियां हो सकती है, लेकिन उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश नहीं किया जाना चाहिए। अच्छी और सकारात्मक चीजों को सामने लाकर इन कमियों को दूर करना क्या हमारा दायित्व नहीं है।
आम आदमी पर फिल्मों का बहुत असर पड़ता है और उनके सहयोग के बिना पुलिसिंग सफल नहीं हो सकती।, हमें आम आदमी की नजर और नजरिये को बदलना चाहिए।
हमारे देश के मीडिया को भी यह बात भलीभांति समझनी होगी की वह ज्यादातर नकारात्मक खबरों पर जोर ना दे। व उसकी जगह हजारों अच्छी खबरें भी होती हैं, जो मीडिया में दिखाई जनी चाहिए ।
हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी ऐसा मौका जरूर आया होगा, जब पुलिस ने उसकी मदद की होगी और इन बातों को पुलिस बल की छवि बेहतर बनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा प्रचारित किया जाना चाहिए। व प्रत्येक थाना हर सप्ताह एक सकारात्मक स्टोरी को ऑनलाइन करे, तब लोगों को पता चलेगा कि पुलिस ने कितने अच्छे काम किए हैं।
जैसे की आम जनता यह मानती है की पुलिस सबसे ज्यादा भ्रष्ट विभाग है जो की सही नहीं है पुलिस से भी ज्यादा भ्रष्ट अन्य सरकारी महकमा है लेकिन आम जनता में पुलिस की प्रति ऐसा छवि है की पुलिस ही सबसे बड़ी भ्रष्ट विभाग है ! जोकि एक सही बात नहीं ।
पुलिस की सकारात्मक छवि होने से पुलिस कर्मचारियो का मनोबल उच्चा रहता है तथा विकाश का मार्ग प्रसस्त करने में उपयोगी भुमिका निभाती है तथा समाज के अन्दर कानून के राज्य स्थापित करने में आसानी होता है !
पुलिस के सकारात्मक छवि होने पे हर पुलिस कर्मी सोचता है की जनता हमारे साथ है और जरुरत पड़ने पे हमें पोलिसिंग करने में मदद करेगी ! इस लिए पुलिस को अपनी सकारात्मक छवि हमेशा बनाये रखना चाहिए ।
अगर पुलिस सकारात्मक छवि नहीं रखती है तो निम्नलिखित उद्देश्यों को पूरा करने में काफी कठिन हो सकता है !
विभागीय उद्देश्य की पूर्ति करना जिसमे अपराधो की रोकथाम करना और कानून व्यवस्था को कायम करना !
मानव मूल्यों को कायम रखते हुए सामाजिक न्याय प्रदान करना !
जनापेक्षाओ की पूर्ति करना !
जनता की सहायता व सहयोग प्राप्त करना !
नैतिक मूल्यों की रक्षा करना व पुलिस मनोबल को बढ़ाना !
प्रभावी ढंग से कर्तव्य पालन हेतु कार्यक्षमता को बढ़ाना !
आमलोगों से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध कायम रखना !
सभी के अधिकारों की रक्षा करना व न्याय दिलाना !
जैसा कि हम सब ने देखा कि जमिया हिंसा में पुलिस की छवि पर एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ था ।
तमाम ऐसी तस्वीरें सामने अयी थी जहा दिखाई दे रहा था कि पुलिस बोहोत अमानवीय कार्य कर रही थी , इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता के पुलिस कई जगह बर्बरता करती है , लकिन इस बात को इस तरह से कहना की पुलिस ही गलत है तो यह सही नहीं होगा ।
पुलिस की डोर सरकार के हाथ में होती है , और हमे यह बात अच्छे से समझनी होगी , सरकार के आदेश से अलग कार्य कोई पुलिसकर्मी नहीं कर सकता ।
लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि पुलिस की सिर्फ गलत छवि को पेश किया जाता है ।
जहा ऐसा आभास होता है कि पुलिस मासूमों पर अत्याचार कर रही है , जोकि सिक्के का एक ही पहलू होता है , कई बार तस्वीरो में दिख रही पुलिस अपराधी को मार रही होती है , लेकिन तस्वीर को गलत तरह से पेश किया जाता है और कहा जाता है कि पुलिस निर्दोष को मार रही है ।
हमारे समाज को यह समझना होगा कि पुलिस हमारी भलाई के लिए है , हमारी बुराई के लिए नहीं ।
कई बार तस्वीरें ऐसी सामने आती है जिसमें पुलिसकर्मी गर्मी से बेहाल है फिर भी वह पूरी निष्ठा से अपना कर्तव्य अपनी ड्यूटी को कर रहा है ,
रात में बिना हवा के मच्छरों के साथ खुले आसमान के नीचे वह खड़ा होकर पूरी रात गुजर रहा है क्युकी उसकी नौकरी वह है ।
महीनों अपने घरवालों से दूर रहने व अपने बच्चो से दूर रहने का दर्द एक फौजी और एक पुलिसकर्मी ही समझ सकता है ।
दो - दो दिन बिना सोए बिताना कैसा होता है यह एक फौजी व पुलिसकर्मी ही समझ सकता है ।
पुलिसकर्मी कभी अपनी ड्यूटी खत्म नहीं करता है , मतलब बड़े साहब का आदेश जिस वक्त भी आ जाए चाहे आधी रात हो या दिन उसको उस समय जाना होता है ।
फिल्मी दुनिया के कलाकारों व निर्माताओं को इस बात का ख्याल रखना होगा कि पुलिस की छवि हमेशा गलत पेश करना हमारे समाज के लिए लाभदाई नहीं होगा ,
सिर्फ विभाग में चांद भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को वजह से पूरे पुलिस प्रशासन को बुरा कहना व कटघरे में खड़ा करना सही नहीं ।
हमे व हमारे समाज को यह समझना चाहिए कि पुलिस बुरी नहीं , फिल्मों में दिखाई जाने वाली पुलिस की छवि सही नहीं व मीडिया में पुलिस के बुरे कर्यो को ही दर्शाना सही नहीं ।
पुलिस का एक छोटा हिस्सा दूषित है और उसके कारण हमे पूरे प्रशासन को दूषित कहना सही नहीं ।
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