आज़ादी के बीते 73 वर्ष के बाद एक नई सुबह एक नई आज़ादी
आज देश को आज़ाद हुए 73 वर्ष पूरे हो गए है ।
आज़ादी के बीते इन 73 वर्षों में हमने बोहोत कुछ पाया व खोया है ,
कई सरकारें आयी व गई है , और इतने लंबे वक्त में देश में बोहोत कुछ बदला लेकिन श्री भीमराव अंबेडकर का संविधान आज भी अटल है ।
ज़रूरत है तो संविधान में कुछ कठोर बदलाव की
इतने लंबे वक्त के बाद कुछ लोगो ने संविधान के अलग अलग मतलब निकाल लिए है , और जिसके द्वारा वह राष्ट्रीय की अखंडता और एकता में बाधा बनते है ,
ऐसे में ज़रूरत है के नियमो को और बेहतर व कठोर बनाने की ,
क्युकी 73 वर्षों के बाद भी आज भी चोरी हो रही है , मासूमों का खून आज भी हो रहा है , रात का अंधेरा हो या दिन का उजाला महिलाओ से बलात्कार दिन बा दिन बढ़े ही है ,
क्यों ना आज एक आज़ादी इन लोगो को भी दिलाई जाए ,
क्यों ना उन महिलाओ को एक बार फिर आज़ादी दी जाए जहा वह अपनी मर्ज़ी से बिना किसी के डर से घर से बाहर किसी भी वक़्त कदम रख सके ,
उन बुज़ुर्ग वर्ग के लोगों को आज़ादी मिले जहा उनके साथ चोरी होने का डर उन्हें ना सताए ,
क्यों ना आज एक बार फिर नई मिसाल कायम कि जाए , जहा सब लोग खुशी , प्रेम व सम्मान से जीवन जिए , और जहा देश की तरक्की और समाज का कल्याण हो ।
समस्त देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं !
Thats really appreciating...and it need to be go through the people as much as possible
जवाब देंहटाएंthank you 😊 ...
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